।ददमगनतम.१
संख्या-2188 /27&4&67 डब्लू/96
प्रेषक,
प्रमुख सचिव,
सिंचाई विभाग,
उत्तर प्रदेच्च शासन ।
सेवा में,
प्रमुख अभियन्ता,
सिंचाई विभाग, उ० प्र०
लखनऊ ।
सिंचाई अनुभाग.4 लखनऊः दिनांकः 01 मई, 2008
विषयः सिंचाई प्रबन्धन में कृषकों की सहभागिता हेतु ''जल उपभोक्ता समितियों'' एवं ''कुलाबा समितियों'' के गठन के संबंध में ।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक राज्य की नहर प्रणालियों पर जल उपभोक्ता समितियों के गठन हेतु जारी शासनादेच्च संख्या २०७ध्२००१.२७. सिं-४.६७डब्लूध्९६ दिनांक १८.१.२००१ का अतिक्रमण करते हुए मुझे यह कहने का निदेच्च हुआ है कि उक्त शासनादेच्च के क्रियान्वयन के संबंध मे प्राप्त अब तक के अनुभवों एवं विभिन्न कार्यच्चालाओं मे प्राप्त संस्तुतियों तथा सुझावों पर सम्यक् विचारोपरांत अब इस संबंध मे निम्नलिखित कार्यवाही किये जाने का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है :-
(अ) कुलाबा स्तरीय प्रबंधन
1.
कुलाबा कमाण्ड में जल वितरण व्यवस्था सुदृढ़ किये जाने हेतु प्रत्येक कुलाबे पर कुलाबा समितियों का गठन किया जायेगा । कुलाबा कमाण्ड के सभी कृषक कुलाबा समिति के सदस्य होंगे।
2.
यदि एक कृषक की भूमि कई कुलाबा कमाण्ड में है, तो वह उन सभी कुलाबा समितियों का सदस्य होगा जिनके कमाण्ड में उसकी भूमि है।
3.
कुलाबा समिति की कार्यकारिणी के गठन हेतु कुलाबा कमाण्ड को छह उपक्षेत्रों में इस प्रकार विभाजित किया जायेगा कि प्रत्येक उपक्षेत्र में कृषकों की संख्या लगभग समान हो तथा
शीर्ष, मध्य व अंतिम क्षेत्रों में दो-दो उपक्षेत्र हों । प्रत्येक उपक्षेत्र के कृषकों द्वारा कुलाबा समिति की कार्यकारिणी के लिये एक प्रतिनिधि सदस्य का निर्वाचन किया जायेगा ।
4.
जिन उपक्षेत्रों में महिला, अनुसूचित जाति / जनजाति एवं सीमान्त कृषकों की संख्या सर्वाधिक है उन्हें यथास्थिति महिला ,अनुसूचित जाति / जनजाति एवं सीमान्त कृषकों हेतु आरक्षित घोषित किया जायेगा।
5.
उप क्षेत्रों के कृषकों द्वारा कुलाबा कार्यकारिणी के लिए प्रतिनिधि सदस्यों तथा कुलाबा समादेच्च के कृषकों द्वारा अध्यक्ष का चुनाव विभागीय प्रतिनिधि की उपस्थिति में किया जायेगा ।कुलाबा समादेच्च जिन गॉवों में स्थित है, वहॉ डुगडुगी पिटवा कर चुनाव हेतु बैठक के लिये निर्धारित स्थान,
दिवस व समय की सूचना कम से कम एक सप्ताह पूर्व सार्वजनिक की जायेगी। इस कार्य का दायित्व विभागीय अधिकारियों का होगा।
6.
यदि किसी कृषक की भूमि एक से अधिक कुलाबा उपक्षेत्र तथा / अथवा कुलाबा समादेच्च में है तो भी वह अपनी पात्रता के अनुरूप किसी एक पद हेतु ही निर्वाचन योग्य माना जायेगा।
7.
अध्यक्ष तथा कार्यकारिणी के छह सदस्य आपसी सहमति से एक सचिव का चयन करेंगे।
8.
यदि चुनाव के लिये प्राधिकृत अधिकारी को उपक्षेत्र के ५०ः से अधिक कृषकों द्वारा किसी उपक्षेत्र के अभ्यर्थी के समर्थन में पत्र दिया जाता है तो इसकी वास्तविकता से संतुष्ट होने के उपरान्त सक्षम अधिकारी द्वारा उस अभ्यर्थी को निर्वाचित घोषित कर दिया जायेगा। इसी प्रकार यदि कुलाबा समादेच्च के ५०ः से अधिक कृषकों द्वारा कुलाबा समिति के किसी सदस्य को अध्यक्ष बनाने के समर्थन में पत्र दिया जाता है तो इसकी वास्तविकता से संतुष्ट होने के उपरान्त सक्षम अधिकारी द्वारा उस अभ्यर्थी को अध्यक्ष पद हेतु निर्वाचित घोषित कर दिया जायेगा।
9.
कुलाबा समिति कार्यकारिणी के गठन की औपचारिक अधिसूचना पदाधिकारियों के नाम , पदनाम तथा गठन की तिथि सहित विभाग के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा जारी की जायेगी ।
10. कुलाबा समिति कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा । यदि कोई सदस्य समिति की बैठकों में लगातार ५ बार अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जायेगी। तत्पच्च्चात् अवच्चेष अवधि हेतु विहित प्रक्रिया के द्वारा रिक्त पद को भरा जायेगा।
11. कुलाबा समितियों द्वारा निम्न उदद्ेच्च्य की पूर्ति हेतु कार्य किये जायेंगेः
(प) सहकारिता की भावना को प्रोत्साहित करना और इस भावना से प्रेरित होकर जल के कमाण्ड क्षेत्र के अन्तिम छोर तक समान जल वितरण को सुनिच्च्िचत करना तथा उपयोग के संबंध में उत्पन्न होने वाले विवादों का समाधान करना ।
(पप) अनधिकृत सिंचाई को रोकना तथा अनुच्चासित ढंग से जल प्रयोग करने की भावना पैदा करना।
(पपप) भूतलीय जल के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
(पअ) नहरी पानी के उपयोग की क्षमता में वृद्धि करने के लिये फसल को जल की आवश्यकतानुसार मापित जल की आपूर्ति करना।
(अ) कृषकों को वैज्ञानिक ढंग से जल उपयोग हेतु प्रेरित करना और जल वितरण व्यवस्था के प्रबंध हेतु उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
(अप) उन्नत सिंचाई तथा कृषि के तरीकों के प्रयोग से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना।
(अपप) प्रक्षेत्र विकास कार्यो के रख-रखाव हेतु एक उत्तरदायी संस्था का सृजन करना।
(अपपप) जल उपभोक्ता समिति के पास जो सिंचन साधन हैं उनके रख-रखाव और बकाया तथा जुर्माने की वसूली का समस्त प्रबंध करना।
(पग) सिंचाई के साधनों को प्रारम्भ, समुन्नत तथा विकसित करना।
(ग) उपरोक्त उद्देश्यों या इनमें से किसी एक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, जो कार्य आवश्यक सहायक या आकस्मिक हो, का कार्यान्वयन।
१२. जो कुलाबे कमान प्रक्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आच्छादित है उन पर कुलाबा समितियों के
गठन का कार्य जल संसाधन एवं भूमि विकास विभाग द्वारा किया जायेगा। शेष कुलाबों पर यह कार्य सिंचाई विभाग द्वारा किया जायेगा। उत्तर प्रदेच्च वाटर सेक्टर परियोजना के क्षेत्रान्तर्गत पड़ने वाली अल्पिकाओं पर कुलाबा समितियों के गठन का कार्य परियोजना द्वारा कराया जायेगा ।
१३. कुलाबा समिति का त्रिवर्षीय कार्यकाल पूर्ण होने पर पुनः निर्वाचन प्रक्रिया द्वारा कुलाबा समादेच्च एवं उपक्षेत्र के प्रतिनिधियों का निर्वाचन कराया जायेगा। किसी पदाधिकारी के पुनः निर्वाचन पर कोई प्रतिबंध नही होगा।
(ब) अल्पिका स्तरीय प्रबंधन
1.
प्रत्येक अल्पिका स्तर पर जल उपभोक्ता समिति का गठन सिंचाई विभाग द्वारा किया जायेगा। अल्पिका के कमान क्षेत्र के सभी कृषक जल उपभोक्ता समिति के सदस्य होंगे। जल उपभोक्ता समिति की कार्यकारिणी का गठन अधिच्चासी अभियन्ता द्वारा निम्नानुसार किया जायेगाः
I.
अल्पिका के सभी कुलाबा समिति के अध्यक्ष
II.
अल्पिका कमांड के ग्राम पंचायतों की जल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष
III.
अल्पिका कमाण्ड के दो प्रगतिच्चील कृषक, जिन्हे जिलाधिकारी द्वारा नामित किया जायेगा।
2.
यदि उपरोक्त प्रस्तर-०१ मे अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला तथा सीमान्त कृषक का प्रतिनिधित्व नहीं पाया जाता है तो रिक्त वर्गों के एक-एक प्रतिनिधि का मनोनयन कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा आपसी सहमति / निर्वाचन द्वारा किया जायेगा। इस प्रकार से उसी व्यक्ति का मनोनयन किया जायेगा जो किसी कुलाबा समिति का निर्वाचित सदस्य हो।
3.
अल्पिका के टेल पर स्थित कुलाबा समिति के अध्यक्ष जल उपभोक्ता समिति तथा इसकी कार्यकारिणी के अध्यक्ष होंगे तथा शीर्ष के कुलाबा पर बनी समिति के अध्यक्ष जल उपभोक्ता समिति तथा इसकी कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष होंगे। सिंचाई विभाग का प्रतिनिधित्व एक विभागीय अधिकारी/ कर्मचारी द्वारा किया जायेगा, जो इस समिति का सचिव होगा।
4.
कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा आपसी सहमति अथवा निर्वाचन द्वारा एक कृषक सचिव तथा एक कोषाध्यक्ष का चयन किया जायेगा। विभागीय सचिव का यह दायित्व होगा कि वे एक वर्ष की अवधि में कृषक सचिव को सचिव के उत्तरदायित्वों के निर्वहन हेतु पूर्ण रूप से प्रच्चिक्षित कर दें।
5.
जल उपभोक्ता समिति कार्यकारिणी के गठन की औपचारिक अधिसूचना पदाधिकारियों के नाम , पदनाम तथा गठन की तिथि सहित अधिच्चाषी अभियन्ता द्वारा जारी की जायेगी ।
6.
नई कार्यकारिणी के पुर्नगठन की प्रक्रिया पूर्ण होने तक पुरानी कार्यकारिणी के सदस्य पदासीन रहेंगे।
7.
सभी जल उपभोक्ता समितियों का रजिस्ट्रेच्चन सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के अन्तर्गत कराया जायेगा तथा संबंधित अधिच्चासी अभियन्ता शासनादेच्च संख्या २६५२ध्०३.२७.सिं-४.६७डब्लू ध्९६ दिनॉक ४.०९.२००३ द्वारा निर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित प्रारूप पर सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के पश्चात अल्पिका का प्रबंधन जल उपभोक्ता समिति को सौपेंगे।
8.
जल उपभोक्ता समिति के उद्देच्च्य निम्नानुसार होंगे :
(प) पैतृक नहर से जल प्राप्त करना एवं समिति कमाण्ड क्षेत्र के बीच उसका समान रूप से वितरण करना।
(पप) अल्पिका से निकलने वाले जल के वितरण नेटवर्क के रख-रखाव का कार्य।
(पपप) अल्पिका व उसके निर्माण कार्यो के रख-रखाव, अभिलेखन, आदि।
(पअ) अल्पिका के कमाण्ड क्षेत्र में कृषि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु सूक्ष्म स्तरीय प्रणाली में तकनीकी तथा भौतिक सुधार/कृषि तकनीकी प्रदान करना।
(अ) समिति के चालू खर्च को पूरा करने के लिये संसाधन को सृजित करना।
(अप) समिति के कमाण्ड क्षेत्र में जल की मात्रा को दृष्टिगत रखकर
समय से
सिंचाई या अन्य कार्य जैसे चैनल, तालाब, नाला, जलाच्चय, बांध, नलकूप इत्यादि की खुदाई एवं रख -रखाव के लिए राज्य सरकार से भूमि प्राप्त करना।
(अपप) जल की उपलब्धता की जानकारी विभाग से प्राप्त करना, व अल्पिका का ऑपरेच्चन-प्लान तैयार कराना एवं उसके कार्यान्वयन का अनुश्रवण एवं मूल्याकंन करना।
(अपपप) जल की बर्बादी रोकना एवं उसका उचित उपयोग सुनिच्च्िचत करना।
(पग) अल्पिका से सम्बन्धित समिति क्षेत्र में जल-निकासी की व्यवस्था करना।
(ग) बेहतर उत्पादकता एवं संबधित विकास कार्यो के लिए सहायक सेवाओं, च्चिक्षा एवं किसानो के प्रच्चिक्षण एवं
सिंचाई
के पहले
एवं बाद
के समय
के लिए उपादान (इनपुट) एवं कृषि विस्तार सेवा एवं मार्केटिंग की व्यवस्था की कार्यवाही करना।
(गप)
सिंचाई सहकारी समिति के द्वारा कृषि सामग्री की आपूर्ति और सेवा केन्द्रों की स्थापना करके कृषकों को सिंचित खेती द्वारा अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने योग्य बनाना।
(गपप) सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त शुल्क लगाना।
(गपपप) उपरोक्त उद्देश्यों या इनमें से किसी एक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, जो कार्य आवश्यक सहायक या आकस्मिक हो, का कार्यान्वयन।
9.
अल्पिकाओं का प्रबन्धन तीन वर्ष के लिए हस्तांतरित किया जायेगा, जिसकी व्यवस्था निम्नानुसार होगीः- 1. प्रथम चरण में सिंचाई विभाग एवं जल उपभोक्ता समितियों द्वारा नहर का संयुक्त प्रबंधन किया जायेगा, परन्तु इससे पूर्व यह सुनिच्च्िचत कर लिया जायेगा कि सिंचाई विभाग इन अल्पिकाओं का न्यूनतम पुनर्वास कर नहरों को उसकी परिकल्पित क्षमता से चलाने के लिए सक्षम करेगा ।
२ण् द्वितीय चरण में नहरों का रख रखाव एवं परिचालन कार्य जल उपभोक्ता समितियों को पूर्ण रूप से सौंप दिया जायेगा ।इनके अनुरक्षण हेतु शासन द्वारा मात्र एक निर्धारित अवधि के लिए सहायता अनुदान दिया जायेगा ।
३ण् तृतीय चरण में जल उपभोक्ता समितियाँ उपभोग किये गये जल का जल शुल्क स्वयं निर्धारित कर उसकी वसूली एवं अनुरक्षण संबंधी कार्य करने के लिए भी उत्तरदायी होंगी।
(स) राजबाहा स्तरीय प्रबंधन
1.
नहर प्रणालियों के राजबाहों पर भी सहभागी सिंचन प्रबन्धन हेतु राजबाहा प्रबंधन समिति अधिच्चासी अभियन्ता द्वारा गठित की जायेगी ।उक्त राजबाहों से लाभान्वित होने वाले समस्त कृषक इसके सदस्य होगें।
2.
अधिच्चासी अभियन्ता, सिंचाई विभाग, जिलाधिकारी के संज्ञान में लाते हुये राजबाहा प्रबंधन समितियों की कार्यकारिणी गठित करेगें, जिसमें निम्न सदस्य होगें :-
;पद्ध राजबाहे की समस्त अल्पिका स्तर की जल उपभोक्ता समितियों के अध्यक्ष ।
;पपद्ध कमाण्ड क्षेत्र के दो प्रगतिच्चील कृषक, जिन्हें जिलाधिकारी द्वारा नामित किया जायेगा।
;पपद्ध अधिच्चासी अभियन्ता द्वारा नामित एक विभागीय कर्मचारी ।
3. राजबाहे की टेल की अल्पिका की जल उपभोक्ता समिति का अध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होगा ।
(द) विस्तार एवं मूल्यांकन
1. संच्चोधित कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन कार्यक्रम में कुलाबा समितियो की तथा जल उपभोक्ता समितियों की सहभागिता हेतु विच्चेष प्रयास किये जायेंगे। संच्चोधित कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन कार्यक्रम मे भारत सरकार द्वारा नहर प्रणाली की सिस्टम डिफीसियेन्सी के सुधार हेतु जो परियोजनाएं भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग के माध्यम से कराई जायेंगी उनके कार्यों को कराने से पूर्व सिंचाई विभाग से अनुमति प्राप्त की जायेगी ताकि दोनो विभागों के सामन्जस्य से आवच्च्यकतानुरूप कार्य हों तथा संसाधनों का अपव्यय न हो। इन योजनाओं के अधीन कार्र्यो को जल उपभोक्ता समितियों की सहभागिता से कराया जाय। इनके अनुरक्षण एवं संचालन का कार्य भी यथासंभव जल उपभोक्ता समितियों द्वारा ही कराया जाये। यदि कोई समिति निष्क्रिय अथवा अक्षम है तो विभागीय कर्मचारी
/ अधिकारीगण उनसे जुड़ कर उनकी सक्रियता विकसित करेंगे तथा पूर्ण प्रयास करेंगे कि हर स्तर पर जल उपभोक्ता समितियों का सहभाग बना रहे।
2. सिंचाई विभाग के द्वारा भी भविष्य में अल्पिका एवं कुलाबा स्तर पर कराये जाने वाले कार्र्यो में जल उपभोक्ता समिति की सक्रिय सहभागिता सुनिच्च्िचत की जायेगी।
3. जल उपभोक्ता समितियों को केवल पानी व नहर से सम्बन्धित बिन्दुओं तक ही सीमित न रखा जाये, बल्कि उन्हें विकास तथा गरीबी उन्मूलन की विभिन्न योजनाओं से भी जोड़ा जाये। इसके लिए विभिन्न विभागीय एवं क्षेत्र स्तरीय अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ गहन समन्वय स्थापित किया जाये व जिला स्तर पर विद्यमान विकासात्मक ढॅांचे का पूरा उपयोग किया जाये। इस हेतु जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी का पूरा सहयोग प्राप्त किया जायेगा। सिंचाई विभाग द्वारा प्रत्येक जनपद में माह के द्वितीय गुरूवार को चलाये जा रहे ÷सिंचाई विभाग आपके द्वार' कार्यक्रम में सहभागी सिंचाई प्रबन्धन कार्यक्रम की रूप रेखा संबंधित पुस्तिका कृषकों में वितरित की जायेगी तथा उनको इसके लक्ष्य एवं लाभों से अवगत कराया जायेगा। अपरान्ह के सत्र में जिला प्रच्चासन के सहयोग से निम्न विभागों के अधिकारियों की सहभागिता से ÷समग्र ग्रामीण विकास' विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की जायेगी :
(१) कृषि विभाग, (२) उद्यान विभाग, (३) पच्चुपालन विभाग (४) भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग, (५) लघु सिंचाई विभाग, (६) सहकारिता विभाग, (७) ग्राम्य विकास विभाग (८) मत्स्य पालन विभाग इत्यादि ।
(य) अनुश्रवण एवं मूल्यांकन
:
I.
मुख्य अभियन्ता (पूर्व) की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति द्वारा जल उपभोक्ता समितियों के कार्य कलापों का अनुश्रवण व मूल्यांकन समय-समय पर किया जायेगा । यदि किसी समिति के क्रियाच्चील होने मे कठिनाई आती है तो विच्चेष प्रयासों द्वारा इसे दूर कर उसे सच्चक्त बनाने का प्रयत्न किया जायेगा। सभी अधिकारी एवं कर्मचारी ''राज्य जल नीति'' एवं ''सहभागी सिंचाई प्रबन्धन'' संबंधी शासकीय संकल्प को ध्यान में रखते हुए नहर प्रणाली की अल्पिकाओं पर सहभागी सिंचाई प्रबन्धन व्यवस्था लागू करेगें जिससे कृषकों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने के साथ साथ जल का दक्ष एवं इष्टतम उपयोग हो सके तथा कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो सके।
कृपया उपरोक्त आदेच्चों का कड़ाई से अनुपालन करने हेतु सभी संबंधित को अपने स्तर से निर्देच्चित करें।
संख्या.२११८ध्;१द्धध्२७. ४ .६७डब्लू ध्९६ध् तद्दिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवच्च्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :-
1.
प्रमुख सचिव/सचिव कृषि, भूमि विकास एवं जल संसाधन, ग्राम्य विकास, वित्त, उद्यान, पशुपालन, लघु सिंचाई, सहकारिता, मत्स्य विभाग ।
2.
अध्यक्ष, पैक्ट उत्तर प्रदेच्च वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट।
3. आयुक्त ग्राम्य विकास, उ०प्र०।
4. रजिस्ट्रार, फर्म्स चिट्स तथा सोसाइटी, उ०प्र०।
5. आयुक्त एवं प्रच्चासक , शारदा सहायक समादेच्च, २३ सी, गोखले मार्ग, लखनऊ।
6. अध्यक्ष एवं प्रच्चासक , रामगंगा कमाण्ड परियोजना, कानपुर।
7. निदेच्चक कृषि / उद्यान / पशुपालन / मत्स्य।
8. निदेच्चक एवं मुख्य अभियन्ता, लघु सिंचाई, उ०प्र०, लखनऊ।
9. समस्त मण्डलायुक्त, उत्तर प्रदेच्च ।
10. समस्त जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेच्च ।
11. समस्त मुख्य विकास अधिकारी, उ०प्र०।
12. गोपन अनुभाग &1 , उत्तर प्रदेच्च शासन।
आज्ञा से
( ए०के०एस०पुण्डीर )
विशेष सचिव